स्वास्थ्य को एक तत्व के रूप मैं देखने पर इसे इस प्रकार समझा जा सकता है की स्वास्थ्य नियमों
और प्रकृति के साथ तालमेल से बढ़ता है क्रमशः संवर्धित होता है. साथ ही उपेक्षा और प्रतिकूल
आचरण से इसका क्षय होता है.
व्यायाम करने वाले और शुद्ध पौष्टिक आहार से savasthya संवर्धन होता है तो निष्क्रियता का जीवन जीने वाले
मोटे या दुबले रह जाते हैं
अतः स्वास्थ्य को एक तत्व समझना चाहिए जहां की एक छोटी सी पर नियमित
रूप से की जाने वाली गतिविधि भी आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है.
बुधवार, 19 मई 2010
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