बुधवार, 19 मई 2010

svasthya ek tatva

स्वास्थ्य को एक तत्व के रूप मैं  देखने पर इसे इस प्रकार समझा जा सकता है की स्वास्थ्य नियमों
और प्रकृति के साथ तालमेल से बढ़ता है क्रमशः संवर्धित   होता है.  साथ ही उपेक्षा और प्रतिकूल
आचरण से इसका क्षय  होता है.
व्यायाम करने वाले और शुद्ध पौष्टिक आहार से savasthya संवर्धन होता है तो निष्क्रियता का जीवन जीने वाले
मोटे या दुबले रह जाते हैं
अतः स्वास्थ्य को एक तत्व समझना चाहिए जहां की एक छोटी सी पर नियमित
रूप से की जाने वाली गतिविधि  भी आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है.

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