मंगलवार, 18 मई 2010

kayakalp

बिना औषधियों के कायाकल्प
हम देखते हैं की बहुत से लोग कायाकल्प के इच्छुक है; आज की व्यस्त जीवनशैली मैं
कृत्रिमता का समावेश हमारे जीवन मैं इतना हो गया है की प्रकृति के अनुसरण से ही
खोया हुआ स्वास्थ्य वापस पाना संभव हो सकता है.अपनी बुद्धिमता का अनुचित उपयोग कर
मनुष्य ने अपने आहार-विहार को अस्वाभाविक बना दिया.खान पान की गलत आदतों मैं
असंयम के कारण मनुष्य स्वास्थ्य सुख को गवां बैठा.जरा गौर करिए पशु पक्षी कितने
स्वस्थ रहते हैं .१०० मैं से कोई एक पशु बीमार मिले.
  अब हम मूल बात पर आते हैं की कायाकल्प कैसे हो खोया हुआ बिगाड़ा हुआ स्वास्थ्य कैसे
हासिल हो. पहली बात आहार से सम्बंधित है  क्या खाए; कब खाए; कैसे खाए;
क्या खाए : जो आहार मनुष्य की अपनी प्राकृतिक अवस्था मैं हो एवं रसेंद्रिय  के अनुकूल
हो वह सबसे उत्तम आहार है. फल और दूध सबसे अच्छा है क्योंकि वह अपने  प्राकृतिक रूप मैं 
जिह्वा के अनुकूल है. सब्जियां को पकाने की आवश्यकता होती है इसलिए उनका स्थान दूसरा है
हालाँकि पोषक तत्त्व उनमें खूब है. ध्यान रखें आहार जितना जीवनी शक्ति से भरा होगा उतना ही ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक होगा. अनाज को अंकुरित कर लेने  से उसमें जीवन लौट आता है.
कब खाए  : खूब भूख लगने पर ही खाया जाए. खाने के सम्बन्ध मैं एक  निश्चित शैली होनी चाहिए. कड़ी भूख और नियत समय ये दोनों बातें हो तब भोजन करना चाहिए.

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