शुक्रवार, 21 मई 2010

prakriti ke sannidhya main

प्रकृति  के साथ समन्वय रखकर ही हम स्वस्थ रह सकते हैं उसकी उपेक्षा
 करके नहीं इसलिए प्राकृतिक नियमों का अनुसरण  करने मैं ही हमारी
भलाई है. प्रकृति के साथ जी कर हम आदर्श स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते हैं.
कुछ आदतें  अक्सर ऐसी हमारे जीवन मैं शामिल होती है जिनका हमारे स्वास्थ्य को
बनाने या बिगाड़ने मैं बहुत योगदान होता है. आइये एक नजर डालकर देखतें
हैं इन आदतों पर.
स्वास्थ्य बनाने वाली आदतें :
१. व्यायाम करना
२. सुबह शाम सैर करना
३. नियमित जीवन शैली
४. स्वच्छता पूर्वक रहना
स्वास्थ्य बिगाड़ने  वाली आदतें :
१. धुम्रपान  करना
२. नशा करना
३. अनियमित जीवन शैली
४. अनाप शनाप खाने की आदत



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बुधवार, 19 मई 2010

svasthya ek tatva

स्वास्थ्य को एक तत्व के रूप मैं  देखने पर इसे इस प्रकार समझा जा सकता है की स्वास्थ्य नियमों
और प्रकृति के साथ तालमेल से बढ़ता है क्रमशः संवर्धित   होता है.  साथ ही उपेक्षा और प्रतिकूल
आचरण से इसका क्षय  होता है.
व्यायाम करने वाले और शुद्ध पौष्टिक आहार से savasthya संवर्धन होता है तो निष्क्रियता का जीवन जीने वाले
मोटे या दुबले रह जाते हैं
अतः स्वास्थ्य को एक तत्व समझना चाहिए जहां की एक छोटी सी पर नियमित
रूप से की जाने वाली गतिविधि  भी आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है.

मंगलवार, 18 मई 2010

kayakalp

बिना औषधियों के कायाकल्प
हम देखते हैं की बहुत से लोग कायाकल्प के इच्छुक है; आज की व्यस्त जीवनशैली मैं
कृत्रिमता का समावेश हमारे जीवन मैं इतना हो गया है की प्रकृति के अनुसरण से ही
खोया हुआ स्वास्थ्य वापस पाना संभव हो सकता है.अपनी बुद्धिमता का अनुचित उपयोग कर
मनुष्य ने अपने आहार-विहार को अस्वाभाविक बना दिया.खान पान की गलत आदतों मैं
असंयम के कारण मनुष्य स्वास्थ्य सुख को गवां बैठा.जरा गौर करिए पशु पक्षी कितने
स्वस्थ रहते हैं .१०० मैं से कोई एक पशु बीमार मिले.
  अब हम मूल बात पर आते हैं की कायाकल्प कैसे हो खोया हुआ बिगाड़ा हुआ स्वास्थ्य कैसे
हासिल हो. पहली बात आहार से सम्बंधित है  क्या खाए; कब खाए; कैसे खाए;
क्या खाए : जो आहार मनुष्य की अपनी प्राकृतिक अवस्था मैं हो एवं रसेंद्रिय  के अनुकूल
हो वह सबसे उत्तम आहार है. फल और दूध सबसे अच्छा है क्योंकि वह अपने  प्राकृतिक रूप मैं 
जिह्वा के अनुकूल है. सब्जियां को पकाने की आवश्यकता होती है इसलिए उनका स्थान दूसरा है
हालाँकि पोषक तत्त्व उनमें खूब है. ध्यान रखें आहार जितना जीवनी शक्ति से भरा होगा उतना ही ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक होगा. अनाज को अंकुरित कर लेने  से उसमें जीवन लौट आता है.
कब खाए  : खूब भूख लगने पर ही खाया जाए. खाने के सम्बन्ध मैं एक  निश्चित शैली होनी चाहिए. कड़ी भूख और नियत समय ये दोनों बातें हो तब भोजन करना चाहिए.

रविवार, 16 मई 2010

sehat ka rakhain dhyaan

दोस्तों,  आपको  अपनी  सेहत का ध्यान रखना चाहिए. अगर हमारी सेहत अच्छी  है तो ही हम इस दुनिया मैं
कोई  बड़ा काम कर सकते है नहीं तो  बीमार आदमी तो अपने घरवालों पर ही  बोझ होता है. सेहत कैसे बनी रहे
यह निर्भर करता है चार बातों पर  १. आहार २. श्रम ३. विश्राम ४. संयम
अब हम इन चारों बातों पर चर्चा करेंगे पहली बात है आहार जिससे की शारीर बनता है और  उसका पोषण
होता  है आहार जहां तक हो सके शुद्ध होना चाहिए, खूब भूख लगने पर चबा चबा कर खाया जाना चाहिए.
दूसरी बात है  श्रम. श्रम या मेहनत से ही शरीर मैं आहार आत्मसात  होतां है इसीलिए पहलवान लोग  घंटों अखाड़े मैं
पसीना बहातें  है. तीसरी बात विश्राम जिससे की फिर से काम करने की शक्ति आती है.
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शुक्रवार, 14 मई 2010

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गुरुवार, 13 मई 2010

sehat ki baat

दोस्तों, तो हम आपसे सेहत के बारे मैं बात करेंगे. सेहत यानी की स्वास्थ्य. जिसके बारे मैं कहा गया है की
तंदरुस्ती हजार नियामत है. अगर आपका स्वास्थ्य अच्छा नहीं है तो आपको  दुनिया की कोई चीज न भाएगी
धन, रूप, नाच, गाना, बजाना सब कुछ आपको नीरस लगेगा इसलिए आपका स्वास्थ्य अगर अच्छी हालत मैं
है तो यह एक बढ़िया बात है नहीं तो आज से ही अपने स्वास्थ्य सुधार की तरफ ध्यान दीजिये, सबसे पहले
समझिये सेहत या स्वास्थ्य क्या है, स्वास्थ्य क्या है, शारीर के सभी अंगो-अवयवो  का सही ढंग से काम करना.
इसके अतिरिक्त स्फूर्ति, उत्साह, चैतन्य, काम मैं मन लगना, त्वचा पर कांति आदि.