सोमवार, 17 मार्च 2014
फलों के रस से चिकित्सा
प्रकृति में पाए जाने वाले सभी फल और सब्जियों से जहाँ मरीज
को सही मात्रा में पोषण मिलता है वहीं स्वस्थ लोगों के लिए
टॉनिक का भी काम करता है। विडंबना यह है कि हम औषधियों के
कटु स्वाद में राहत खोजते हैं और प्रकृति के
उपहारों की उपेक्षा करते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है
कि दुनिया की सभी बीमारियों का इलाज वनस्पतियों में मौजूद है।
वजन बढ़ाने के लिए : वजन बढ़ाने के लिए दुग्ध कल्प बहुत फायदेमंद
होता है। ड्रायफ्रूट्स, गेहूँ के ज्वारे का रस तथा सभी तरह के
फलों के रस से वजन बढ़ सकता है। कब्ज से छुटकारा पाना बहुत
जरूरी होता है।
एसिडिटी के लिए : गाजर-पत्तागोभी, कद्दू और मिश्री, सेबफल-
पाइनएप्पल का रस अम्लपित्त के लिए अच्छा होता है। एक गिलास
पानी में नीबू का रस तथा आधा चम्मच मिश्री मिलाकर दोपहर के
खाने के आधे घंटे पहले लेना चाहिए। आँवले का चूर्ण सुबह और शाम
को जरूर लेना चाहिए। दो वक्त के आहार के बीच सही अंतराल
रखना जरूरी है। तनावमुक्त रहना, प्राणायाम और ध्यान करने से
एसिडिटी में फायदा होता है।
जुकाम : कुनकुने पानी में नीबू का रस डालकर उसके गरारे किए
जा सकते हैं। घूँट-घूँटकर पिया जा सकता है। तुलसी की पत्ती-
पोदीने की पत्ती, आधा बड़ा चम्मच अदरक तथा गुड़ दो कप
पानी में उबालें। फिल्टर करके उसमें एक नीबू का रस डालकर उपयोग
करें।
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