शुक्रवार, 27 मार्च 2015

Your Gadget : मोबाइल खरीदने से पहले

Your Gadget : मोबाइल खरीदने से पहले: मोबाइल मार्केट में कई कम्पनियों ने एक से बढ़कर एक मॉडल्स उतारे,
खरीददारी करते वक्त ऑपरेटिंग सिस्टम के अलावा स्पेसिफिकेशन्स भी
चेक करना जरू...

रविवार, 15 मार्च 2015

सोमवार, 17 मार्च 2014

सब्जियों के बारे में अनूठी खोज

किस तरह की सब्जी शरीर के किस भाग के लिए लाभदायक है, तय करने का एक अनूठा तरीका ही सामने आया है। आइए जानते है इसके बारे में : जमीन से ऊपर उगने वाली सब्जियां जो सब्जियां जमीन से ऊपर उगती हैं, वे हमारे शरीर के ऊपरी भागों को विशेष लाभ पहुंचाती हैं। इसका कारण यह माना गया है कि इनमें ऊर्जा प्रवाह नीचे से ऊपर की ओर होता है। इनसे विशेष तौर पर गले, हृदय और फेफड़ों को फायदा होता है। जमीन की सतह से ऊपर उगने वाली हरी सब्जियों में क्लोरोफिल होता है। दरअसल इस क्लोरोफिल की मौजूदगी के कारण ही ये हरी होती हैं। इसके साथ ही इसमें कैरोटिन नामक तत्व भी होता है। इन हरी सब्जियों को खाने से फायदा यह होता है कि इनमें मौजूद क्लोरोफिल और कैरोटिन मिलकर हमारे रक्त की सफाई करते हैं, लिवर की कार्यक्षमता बेहतर बनाते हैं, आंतों को सेहतमंद रखते हैं और नए ऊतकों के निर्माण में मददगार होते हैं। मैथी, पालक, धनिया, हरी प्याज आदि इस दृष्टि से विशेष तौर पर लाभप्रद हैं। जमीन पर आड़ी उगने वाली सब्जियां जो सब्जियां आड़ी उगती हैं उनमें ऊर्जा का प्रवाह भी आड़ा होता है। माना जाता है कि ये शरीर के मध्य हिस्से के लिए खास तौर पर फायदेमंद होती हैं। पेट, आंतों और जननेंद्रियों को इनसे लाभ होता है। इनमें आलू, ककड़ी आदि शामिल हैं। ND सतह के करीब उगने वाली सब्जियां जो सब्जियां जमीन की सतह के पास उगती हैं, उनमें ऊर्जा का प्रवाह भीतर की ओर होता है। समझा जाता है कि इनसे शरीर के निचले अंगों में संतुलन आता है। फूलगोभी, पत्तागोभी, प्याज, कद्दू आदि इस श्रेणी में आते हैं। जमीन के अंदर उगने वाली सब्जियां कुछ सब्जियां जमीन के नीचे उगती हैं लेकिन उनकी पत्तियां जमीन की सतह के ऊपर रहती हैं। बताया जाता है कि इन सब्जियों में ऊर्जा का प्रवाह ऊपर से नीचे की ओर होता है। इन्हें खाने से हमारे पाचन संस्थान को ऊर्जा मिलती है। ऐसी सब्जियों में गाजर और मूली प्रमुख हैं। कुल मिलाकर यदि हम सभी प्रकार की सब्जियां संतुलित रूप से खाएं तब पूरे शरीर को लाभ पहुंचा सकते हैं। किसी अंग विशेष की समस्या के लिए उसे लक्ष्यित लाभ पहुंचाने वाली सब्जी का सेवन कर सकते हैं।

फलों के रस से चिकित्सा

प्रकृति में पाए जाने वाले सभी फल और सब्जियों से जहाँ मरीज को सही मात्रा में पोषण मिलता है वहीं स्वस्थ लोगों के लिए टॉनिक का भी काम करता है। विडंबना यह है कि हम औषधियों के कटु स्वाद में राहत खोजते हैं और प्रकृति के उपहारों की उपेक्षा करते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि दुनिया की सभी बीमारियों का इलाज वनस्पतियों में मौजूद है। वजन बढ़ाने के लिए : वजन बढ़ाने के लिए दुग्ध कल्प बहुत फायदेमंद होता है। ड्रायफ्रूट्स, गेहूँ के ज्वारे का रस तथा सभी तरह के फलों के रस से वजन बढ़ सकता है। कब्ज से छुटकारा पाना बहुत जरूरी होता है। एसिडिटी के लिए : गाजर-पत्तागोभी, कद्दू और मिश्री, सेबफल- पाइनएप्पल का रस अम्लपित्त के लिए अच्छा होता है। एक गिलास पानी में नीबू का रस तथा आधा चम्मच मिश्री मिलाकर दोपहर के खाने के आधे घंटे पहले लेना चाहिए। आँवले का चूर्ण सुबह और शाम को जरूर लेना चाहिए। दो वक्त के आहार के बीच सही अंतराल रखना जरूरी है। तनावमुक्त रहना, प्राणायाम और ध्यान करने से एसिडिटी में फायदा होता है। जुकाम : कुनकुने पानी में नीबू का रस डालकर उसके गरारे किए जा सकते हैं। घूँट-घूँटकर पिया जा सकता है। तुलसी की पत्ती- पोदीने की पत्ती, आधा बड़ा चम्मच अदरक तथा गुड़ दो कप पानी में उबालें। फिल्टर करके उसमें एक नीबू का रस डालकर उपयोग करें।

संतुलित भोजन

घर पर ही ऐसा नाश्ता तैयार करके रख लें, जो सेहतमंद होने के
साथ-साथ स्वादिष्ट भी हो। उसे पैक करके ऑफिस ले
आएँ। आटे की नमकीन-मीठी मट्ठियाँ, भुना चिवड़ा, काले भुने चने
आदि पदार्थ ज्यादा लेने की कोशिश करें।
आप ऑफिस मीटिंग के लिए बाहर जाते हैं तो जब भी रेस्टोरेंट में लंच
करना पड़ जाए तो सलाद, सूप आदि अधिक लें।
तले-भुने व गरिष्ठ भोजन की बजाए ऐसे भोजन का आर्डर
दें,जो आपके लिए नुकसानदेह न हो।
गर्मी के मौसम में ठंड पेय लेते समय ध्यान रखें कि ये कैमिकल युक्त न
हों। आप जूस, शरबत, शिकंजी अधिक मात्रा में ले सकते हैं।
काम करते-करते थक जाएँ तो कुर्सी पर ही विश्रामदायक मुद्रा में
बैठ जाएँ। आँख बंद कर लें। ऐसा 10 मिनट तक करें।


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जल चिकित्सा

जल के औषधिय प्रयोग.
हमारे शरीर की अनेक समस्याओं जैसे क्रोध, तनाव,
चिडचिडापन, नपुंसकता, आलस, थकावट, अत्यिधक नींद,
अनिद्रा, सिरदर्द, नाक से खून बहना, चक्कर आना, लकवा,
गठिया, पीठ, गर्दन व जोडों के दर्द दूर करने के साथ ही पौरुष
बल में वृद्धि, आत्म विश्वास, तेज, मनोबल व स्मरणशिक्त में
बढोतरी जैसी आवश्यकताओं के उपचार हेतु आयुर्वेद में सिर्फ
सामान्य जल के प्रयोग द्वारा भी इन स्थितियों के उपचार
का वर्णन देखने में आता है । वे सभी जरुरतमंद लोग
जो एलोपैथी के मंहगे उपचार से दूर रहते हुए
अपनी ऐसी समस्याओं का निराकरण करना चाहें
उनकी जानकारी हेतु जल के द्वारा किये जाने वाले रोगों के
उपचार की विधि निम्नानुसार है-
किसी भी नीले रंग के कांच की बोतल में जल भरकर व
ढक्कन बंद करके उस बोतल को लकडी के किसी पटिये पर
रखकर सात दिनों तक सूर्य के प्रकाश (धूप) में रखा जावे और
सात दिन के बाद उस सूर्य तापित जल को सुबह के वक्त
खाली पेट आधा गिलास मात्रा में लेकर व शेष आधा गिलास
उसमें सादा पानी मिलाकर इसका कुछ दिन नियमित सेवन
किया जावे तो ऐसे व्यक्ति के शरीर से आलस्य,
स्थायी थकावट, मुंह में बार-बार छाले आना और अत्याधिक
नींद आने की समस्या दूर हो जाती है ।
इसी विधि से जब हरे रंग के कांच की बोतल में जल भरकर
उसे सूर्य के प्रकाश में सात दिन रखा जावे और सुबह के वक्त
आधा सादा पानी मिलाकर खाली पेट इसका सेवन
कया जावे तो ऐसे व्यक्तियों के शरीर से अत्यधिक
चिंता करने की मनोवृत्ति, अनिद्रा, आधेसीसी का सिरदर्द,
नाक से खून बहना (नकलोई), आदि समस्याएँ दूर होने के साथ
ही इनके नेत्र ज्योति में बढोतरी होती है ।
वहीं जिन लोगों को लकवा, गठिया, पीठ, गर्दन व
जोडों के दर्द की शिकायत रहती हो तो ऐसे लोगों की इन
समस्याओं का उपचार लाल रंग के कांच की शीशी में भरकर
सूर्य के प्रकाश में सात दिन रखे गये पानी को सुबह खाली पेट
पीने से हो सकता है ।
यद्यपि वर्तमान प्लास्टिक के बढते प्रचलन ने कांच
की शीशियों की उपलब्धता अत्यंत कम कर दी है और रंगीन
कांच की बोतलें मिल पाना तो और भी कठिन हो गया है ऐसे
में बाजार में मिलने वाले इन्हीं रंगों के जिलेटीन पेपर
को रबरबैंड की मदद से सादी सफेद कांच की बोतल पर लगाकर
भी यदि धूप में रखा जावे तो जल जनित इस कलरथैरेपी के पूरे
लाभ प्राप्त किये जा सकते हैं ।
इसके अलावा भी सामान्य सादे जल से इन अतिरिक्त
समस्याओं का भी उपचार किया जा सकता है-
चक्कर आने पर – शीतल जल से स्नान करने के पूर्व सिर
को आगे की ओर झुकाकर उस पर एक मिनिट तक धार बनाकर
पानी डालते रहने से इस समस्या से मुक्ति मिलती है ।
कब्ज निदान हेतु – सादे जल में मिश्री मिलाकर पीने से
कब्ज की समस्या दूर होती है ।
थकावट दूर करने के लिये – दो से तीन मिनीट अपने
पैरों को शीतल जल में दुबोकर बैठने से मस्तिष्क तीव्र होता है,
आँखों को राहत मिसती है, शरीर का नाडीतंत्र शुद्ध
होता है और थकावट तो दूर हो ही जाती है ।
अनेक रोगों से बचाव के लिये – यदि दोपहर के समय
शरीर के मलमूत्र द्वार को शीतल जल से धोया जावे और
यदि सम्भव हो तो कुछ समय ऐसे जल से भरे टब में कमर के हिस्से
तक को डुबोकर बैठा जावे तो ऐसे
व्यक्तियों को कभी नपुंसकता नहीं आती, पौरुषबल में
वृद्धि होती है और हमारे शरीर का वह समस्त नाडीतंत्र
जिसका आधार मूलाधार चक्र से जुडा होता है उसके शीतल
होने से शरीर से क्रोध, तनाव व चिडचिडेपन की भावना दूर
होती है ।
विद्यार्थियों व मानसिक कार्य करने वालों की स्मरण
शक्ति में वृद्धि करने हेतु – पढते वक्त जल का पात्र अपनी मेज
पर रखें व उसे ढंके नहीं तो यह स्थिति स्मरण-शक्ति बढाने में
मददगार साबित होती है । इस दरम्यान बीच-बीच में जल
का आवश्यकतानुसार सेवन भी करते रहना चाहिये और सेवन
करने वाले जल को ढंककर ही रखना चाहिये ।
हीनभावना से मुक्ति पाने के लिये – प्रातःकाल के समय
चुल्लू में गंगाजल लेकर ऊँ नमः शिवाय अथवा गायत्री मंत्र
का सात बार उच्चारण करने के बाद उसका आचमन (सेवन) करते
रहने से किसी भी व्यक्ति की थकावट, नकारात्मकता व
उर्जा की कमी की समस्या दूर होकर उसके तेज, मनोबल व
आत्मविश्वास में चमत्कारिक रुप से पर्याप्त वृद्धि होती है ।
गंगाजल की अनुपलब्धता की स्थिति में सादे जल
को निम्न विधि के अनुसार ऊँ गंगा देव्यो नमः
का मंत्रोच्चार कर अपने सीधे हाथ की रिंगफिंगर के अग्रभाग
को आव्हानि मुद्रा के रुप में स्पर्श कर उस जल को गंगाजल के
स्थानापन्न के रुप में प्रयुक्त किया जा सकता है ।
विशेष जानकारी -पिछले करीब डेढ महिने से ज्योतिष
ज्ञान में अपनी रुचि जाग्रत होने और इन्दौर शहर के वयोवृद्ध
ज्योतिष आचार्य पं. आर्यभट्ट कलशधर शास्त्री (80 वर्षीय)
का सानिंध्य मिल जाने के कारण वर्तमान में मेरा अधिकांश
समय ज्योतिष विद्या के गूढ ज्ञान की प्राप्ति में व्यतीत
हो रहा है और ब्लाग-जगत के साथ ही फेसबुक से भी मैं
इसीलिये फिलहाल करीब-करीब अनुपस्थित दिख रहा हूँ ।
निश्चय ही कुछ और समय स्थिति ऐसे
ही चलती दिखेगी पश्चात् आपके समक्ष अपनी पूर्व
सक्रियता को जीवंत बनाते हुए यथासंभव एक और नये
ज्योतिष ब्लाग के साथ आपको फिर से दिखाई दूंगा और तब
तक भी गाहे-बगाहे आपके समक्ष
आता दिखता तो रहूंगा ही ।
अतः क्षमापना के साथ ही आप सबके प्रति धन्यवाद
सहित...


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